Bagh Caves Madhya Pradesh / बाघ गुफ़ा


 Bagh caves / बाघ कि गुफाएं - Madhya Pradesh


बाघ की गुफाएं वर्तमान में  मध्य प्रदेश के धार जिले में इंदौर से 150 km की दूरी पर स्थित है । यह गुफा प्राचीन ग्वालियर राज्य में विध्यांचल पर्वत की श्रेणी में नर्मदा नदी की सहायक नदी बाघिनी नदी के किनारे स्थित है। स्थानीय लोग इसे पंच पांडव कि गुफा के नाम से पुकारते है । यही पर बाघेश्वरी देवी का प्राचीन मंदिर भी है। बाघ कि गुफाएं भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। बाघ गुफाओं का उत्खनन 5वीं-6वीं शताब्दी ईस्वी में किया गया था । ये गुफाएं गुप्त या सातवाहन काल से संबध रखती है। वर्तमान में बाघ कि कुल 9 गुफाओं में से केवल 2 ही चित्रित गुफा शेष है । इन गुफाओं कि चित्रकारी अजंता के समान है । यह गुफ़ाएं कलीयन कि गुफाओं के नाम से भी प्रसिद्ध है । बाघ की गुफाओं की खोज लेफ्टीनेंट डेंजरफील्ड ने 1818 में कि थी। सर्वप्रथम इन गुफाओं का परिचय डेंजरफील्ड ने मुंबई में प्रकाशित ' साहित्य विनियम संघ ' में किया था । बाघ की ये सभी गुफाएं विहार गुफ़ाएं है जो बौद्ध धर्म से समंधित है , जिनमे से 5 गूफाओं की जानकारी प्राप्त है - और  केवल 2 ही गुफाओं में चित्र शेष  है। 

1 - गृह गुफ़ा 

2 - पांडु गुफ़ा - बोधिसत्व की पेंटिंग । 

3 - हाथीखाना 

4 - रंगमहल

5 - पाठशाला 










चौथी गुफ़ा रंगमहल Hall of Colours के नाम से प्रसिद्ध है। इस गुफ़ा में से सबसे अधिक चित्र प्राप्त हुए है जो इस प्रकार है - दो शोकाकुल नारी, नीले रंग में कबूतर की जोड़ी, 6 पुरुष बादलों के मध्य, 6 महिलाओं के घेरे में एक नर्तकी, 17 घुड़सवारों का समूह, केले के वृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध उपदेश देते। 4 आभूषण धारण किए पुरुष । 

रंगमहल का आलेखन काला, सफेद , हिरोंजी , लाल , पीला तथा नीले रंग में है। इन गुफाओं की प्रतिलीपिया गुजरी महल संग्रहालय ( Gwalior, Madhya Pradesh) में है। बाघ की गुफाएं विश्व विरासत की सूचि मे ( UNESCO ) 1953 मे सम्मिलित किया गया । बाघ गुफ़ा चित्रों मे Tempra विधि का प्रयोग हुआ है । 

इन गुफाओं से महिष्मति के राजा सुबंधु का शिलालेख प्राप्त है । यह गुफाएं भुरभुरे बलुआ पत्थर की चट्टान काटकर बनाई गई है ।

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